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"देवभूमि डेवलपर्स" किताब की समीक्षा :

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 "देवभूमि डेवलपर्स" नवीन जोशी जी द्वारा रचित एक ऐसा उपन्यास है, जो उत्तराखंड के पहाड़ी समाज की बदलती परिस्थितियों, राजनीतिक संघर्षों और तथाकथित विकास त्रासदी को बेहद संवेदनशील और गहराई से उजागर करता है। यह किताब सिर्फ एक कहानी नहीं है बल्कि, पिछले कुछ दशकों में पहाड़ की पीड़ा, विस्थापन और जन आंदोलनों की महागाथा है। इसमें टिहरी बांध के निर्माण के कारण जलमग्न हुए गांवों, पहाड़ों की खाली होती बस्तियों और पलायन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। यह किताब उत्तराखंड राज्य निर्माण की पृष्ठभूमि से लेकर आज तक के विडम्बना पूर्ण विकास की तस्वीर खींचती है। उपन्यास के कथानक पहाड़ों के उस समाज को चित्रित करता है, जहां प्राकृतिक संसाधनों की लूट और राजनीतिक स्वार्थों ने लोगों के जीवन को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। उपन्यास के पात्र न सिर्फ अपनी व्यक्तिगत पीड़ाओं से जूझते हैं, बल्कि वह पूरे पहाड़ी समाज की सामूहिक वेदना को भी व्यक्त करते हैं। उपन्यास उत्तराखंड के "नशा नहीं रोजगार दो" आंदोलन, टिहरी बांध के विस्थापन और खटीमा-मसूरी जैसे ऐतिहासिक घटनाक्रमों का सजीव व...

चिपको आंदोलन

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आंदोलन: 1964 में पर्यावरणविद् और गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता चंडी प्रसाद भट्ट ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके ग्रामीण ग्रामीणों के लिए छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक सहकारी संगठन, दशोली ग्राम स्वराज्य संघ (बाद में इसका नाम बदलकर दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल [डीजीएसएम]) की स्थापना की। जब औद्योगिक कटाई को 1970 में क्षेत्र में 200 से अधिक लोगों की जान लेने वाली भीषण मानसूनी बाढ़ से जोड़ा गया, तो डीजीएसएम बड़े पैमाने के उद्योग के खिलाफ विरोध की ताकत बन गया। चिपको आंदोलन की पहली लड़ाई 1973 की शुरुआत में उत्तराखंड के चमोली जिले में हुई। यहां भट्ट और दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल (डीजीएसएम) के नेतृत्व में ग्रामीणों ने इलाहाबाद स्थित स्पोर्ट्स गुड्स कंपनी साइमंड्स को 14 ऐश के पेड़ काटने से रोका। यह कार्य 24 अप्रैल को हुआ और दिसंबर में ग्रामीणों ने गोपेश्वर से लगभग 60 किलोमीटर दूर फाटा-रामपुर के जंगलों में साइमंड्स के एजेंटों को फिर से पेड़ों को काटने से रोक दिया। । ग्रामीणों को कृषि उपकरण बनाने के लिए कम संख्या में पेड़ों तक पहुंच से वंचित कर दिया गया था, जब सरकार ने बहुत बड़ा ...

बसंत पंचमि अर बसंत ऋतु कु स्वागत:

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जो ल्यौ पंचनाम देवता जो ल्यौ पंचमी का सालै जो ल्यौ हरि, ब्रह्मा, शिव जो ल्यौ मोरी का नारैण जो ल्यौ खोली का गणेश जो ल्यौ बारा मैनों की जसना जो ल्यौ भूमि का भूम्याळ । पंचमी और बसंत ऋतु की शुभकामनाएं। आप सबको पता है कि हमारे देश में माघ, फागुण, चैत में बसंत ऋतु का आगमन होता है। इस समय डांड्यों में सुंदर-सुंदर फूल खिलते हैं। पेड़ों में नई-नई कोंपल आती है और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली हो जाती है। हमारे उत्तराखंड की डांडे भी अयांर, पय्यां, मेलू, ग्वीराल, फ्यूली के फूलों से लकदक हो जाती है और खेत सरसों के फूलों से सज जाते हैं। (बसंत बौड़ीन झूमैलो)। ग्वीराल फूल फुलिगे म्यारा भीना । मालू बेड़ा फ्योलड़ी फूलिगे भीना। भीना । झपन्याली सकिनी फुलिगे घरसारी लयड़ी फुलिगे भीना । डाँड्यूँ फुलिगे बुरांस म्यारा भीना ।  डल फूलो बसन्त बौड़िगे भीना। बसन्त रंग माँ रंगै दै--भीना। ग्वीराल फुलिगे म्यारा भीना)। माघ माह में पूरे उत्तराखंड में बसंत पंचमी मनाने की परंपरा है। इस समय खेतों में जौ, गेहूं की हरियाली हर तरफ बिखर जाती है और और पीले सरसों खेत में ऐसे खेले रहते हैं जैसे कि वह बस...

मकरैण, उतरैण या घी संगरांद:

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सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का दिन मकर संक्रान्ति कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता। है। संक्रान्ति का अर्थ संक्रमण से भी है, सूर्य एक माह तक राशि में रहता है और माना जाता है कि सूर्य के मकर राशि में होने से मृत्यू को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा मोक्ष को प्राप्त होती है। व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य लग्न नवम व दशम का नैसर्गिक कारक होता है। यह आरोग्य, साहस, धर्म-कर्म, नेतृत्व, पैतृक संपति, पिता सुख आदि को प्रभावित करने वाला प्रमुख ग्रह है। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य देवता धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं जबकि मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं। शनि सूर्य के पुत्र हैं मगर अपने पिता से उनका बैर है, शनि के घर में सूर्य के प्रवेश करने पर शनि कष्ट न दे, नुकसान न पहुँचाये इसलिए इस दिन को जप, तप, व दान के लिये उत्तम माना जाता ना है। गढ़वाल में यह दिन मकरैण या खिचड़ी संगरांद के रूप में जाना व मनाया जाता है(उतरायणीं, मकरैणी, घुघुतिया, पुस्योड़िया, मकरैण, उतरैणी, उतरैण, घोल्डा, घ्वौंला, चुन्यात्यार, खिचड़ीयासंग्रांत), क...

उत्तराखण्ड का काला दिन रामपुर तिराहा कांड 2 अक्तूबर:

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उत्तराखंड -दो अक्टूबर मुजफ्फरनगर नगर गोली कांड में शहीद आंदोलन कारी को शत् शत् नमन करते हुए श्रद्धांजलि। रामपुर तिराहा फायरिंग मामला 2 अक्टूबर, 1994 की रात को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के रामपुर तिराहा में निहत्थे उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों पर पुलिस गोलीबारी से संबंधित है। इस भयावह घटना को सहने वाले तमाम लोग व उनके परिवारजन आज भी याद करके दहल व सहम जाते हैं। सन 1994मे दो अक्टूबर को उत्तराखंड के कुमाऊं व गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों ने दिल्ली जंतर-मंतर में उत्तराखंड प्रथक राज्य के लिए मांग की। लेकिन सन 1994 मे यूपी तत्कालीन सरकार के शासन प्रशासन ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को एक अक्टूबर की रात में ही रामपुर तिराहा में रोकर बसों के शीशे तोड़कर बिना बताए पुलिस के द्वारा व शादी वर्दी के लोगों के द्वारा लाठी चार्ज व फायरिंग व पत्थर बाजी करके महिलाओ के साथ अभद्रता व्यवहार व फायरिंग करके बसों को रोकर हजारों की संख्या जा रहे आन्दोलन कारियों को रोक दिया। यहां तक पुलिस के द्वारा फायरिंग में 7लोग शहीद भी हुए। तत्कालीन यूपी सरकार ने उत्तराखंड प्रथक राज्य...

मन बंजारा रे:

“नंदा देवी नाम की एक लड़की की कहानी”

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1976 में महान पर्वतारोही विल्ली अनसोएल्ड की बेटी, नंदा देवी अनसोएल्ड, उस विशाल भारतीय पर्वत पर चढ़ाई करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुईं, जिसके नाम पर उनका नाम रखा गया था। दशकों बाद, मित्र, परिवार और उस अभियान के बचे हुए सदस्य इस विवादास्पद साहसिक यात्रा के दौरान क्या गलत हुआ, इस पर प्रकाश डालते हैं और एक रहस्यमयी युवती के जीवन की झलक देते हैं, जिसने सीमाओं के बिना जीवन जिया। जब विल्ली अनसोएल्ड ने पहली बार हिमालय की उस चोटी को देखा जिसे नंदा देवी कहा जाता है, तब तक वे अमेरिका के महान पर्वतारोही नहीं बने थे। स्थानीय लोग इसे आनंद देने वाली देवी का पर्वत मानते हैं। यह 25,645 फुट ऊँचा है और भारत के उत्तर-पूर्वी कोने में, नेपाल की सीमा के पास, छोटे-छोटे शिखरों की एक घेराबंदी से घिरा हुआ है। नंदा देवी के चरणों तक पहुँचना भी कठिन है — पहले ऋषि गंगा नदी की गहरी घाटी से ऊपर चढ़ना पड़ता है और फिर 14,000 फुट की ऊँचाई पर खतरनाक भूभाग से होकर गुजरना पड़ता है। हालाँकि उस समय दूर से शिखर को निहारते हुए अनसोएल्ड इन बाधाओं को देख नहीं पा रहे थे, परंतु अपनी पूरी ज़िंदगी वे उस क्षण की सोच को याद करते रहे: “म...