ये मन बंजारा रे - गीता गैरोला
"ये मन बंजारा रे" गीता गैरोला द्वारा लिखित एक दिल को छू लेने वाला उपन्यास है, जो पहाड़ी समाज के संघर्ष, जीवन और पहचान की भावनाओं को बहुत ही संवेदनशील तरीके से व्यक्त करता है। लेखिका लिखती हैं यात्राएं हमेशा मानसिक संपन्नता का सोपान होती हैं। यात्राओं में सैंकड़ों लोग मिलते हैं, उनकी कहानी सुनाई देती हैं, लोगों की जिंदगियों की सच्ची तस्वीर मालूम होती है। सुख-दुख की परतें बिखरती हैं, हम अपनी आंखों से देखें, कानों से सुनें दुख सुखों को अपनी झोली में भर कर आगे चल पड़ते हैं। पहाड़ों की उन संकरी उबड़-खाबड़ पगडंडियों पर जो कभी बहुत पास लगती हैं, कभी किसी मोड़ के बाद ओझल हो जाती हैं, कभी दूर चलती दिखाई देती हैं। यात्राओं ने मुझे हमेशा आगे बढ़ाया, रास्ता दिखाया और रास्ता बनाया भी। मुझे यात्राएं हमेशा किताबों की तरह लगती रही हैं। यह किताब पहाड़ों के आत्मीय रिश्तों, पर्यावरण, और वहां के लोगों के जीवन की सच्चाइयों पर आधारित है। "यह मन बंजारा रे" का मुख्य विषय पहाड़ का जीवन और उसमें समाहित प्रेम, दर्द और संघर्ष है। यह एक तरह से आत्मीय खोज का सफर है, जिसमें पात्र अपन...