Posts

मन बंजारा रे:

“नंदा देवी नाम की एक लड़की की कहानी”

Image
1976 में महान पर्वतारोही विल्ली अनसोएल्ड की बेटी, नंदा देवी अनसोएल्ड, उस विशाल भारतीय पर्वत पर चढ़ाई करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुईं, जिसके नाम पर उनका नाम रखा गया था। दशकों बाद, मित्र, परिवार और उस अभियान के बचे हुए सदस्य इस विवादास्पद साहसिक यात्रा के दौरान क्या गलत हुआ, इस पर प्रकाश डालते हैं और एक रहस्यमयी युवती के जीवन की झलक देते हैं, जिसने सीमाओं के बिना जीवन जिया। जब विल्ली अनसोएल्ड ने पहली बार हिमालय की उस चोटी को देखा जिसे नंदा देवी कहा जाता है, तब तक वे अमेरिका के महान पर्वतारोही नहीं बने थे। स्थानीय लोग इसे आनंद देने वाली देवी का पर्वत मानते हैं। यह 25,645 फुट ऊँचा है और भारत के उत्तर-पूर्वी कोने में, नेपाल की सीमा के पास, छोटे-छोटे शिखरों की एक घेराबंदी से घिरा हुआ है। नंदा देवी के चरणों तक पहुँचना भी कठिन है — पहले ऋषि गंगा नदी की गहरी घाटी से ऊपर चढ़ना पड़ता है और फिर 14,000 फुट की ऊँचाई पर खतरनाक भूभाग से होकर गुजरना पड़ता है। हालाँकि उस समय दूर से शिखर को निहारते हुए अनसोएल्ड इन बाधाओं को देख नहीं पा रहे थे, परंतु अपनी पूरी ज़िंदगी वे उस क्षण की सोच को याद करते रहे: “म...

"हिमवंत"कवि चंद्रकुंवर बर्तवाल

Image
चन्द्र कुंवर बर्त्वाल जी का जन्म 20 अगस्त 1919 को उत्तराखण्ड के चमोली (अब रुद्रप्रयाग जिले में )जिले के ग्राम मालकोटी, पट्टी तल्ला नागपुर में हुआ था। शिक्षा पौड़ी,  देहरादून और प्रयाग में हुई।इनके पिता का नाम श्री भूपाल सिंह बर्त्वाल और माता का नाम श्रीमती जानकी देवी था। सन् 1939 में इन्होंने इलाहाबाद से बी. ए. की परिक्षा उत्तीर्ण सन् 1941 में एम. ए. कक्षा में लखनऊ में प्रवेश लिया। क्षय रोग के कारण घर वापस - पंवालिया आ गए। आठ साल पंवालिया और अगस्तमुनि में बीते । अगस्तमुनि में हेडमास्टर बने लेकिन फिर छोड़ दिया। आधुनिक काल के कवि। प्रमुख कृति गीत- माधवी कविता संग्रह। उन्होंने मात्र 28 साल की उम्र में हिंदी साहित्य को अनमोल कविताओं का समृद्ध खजाना दे दिया था।  सरस्वती के वरद पुत्र 'काफल पाक्कू' के अमर गायक, चन्द्रकुँवर बर्त्वाल ने अपनी कालजयी कविताओं में हिमालय का ज्वलन्त जीवन रूप साकार किया है। हिमपण्डित शैल-शिखर, सदानीरा कल-कल करती नदियाँ, लम्बे-चौड़े लहलहाते चरागाह, दूर-दूर तक फैले चीड़, बाँज, बुराँश, देवदार के घने घने जंगल, रंग-बिरंगे फूलों से लदालद भरी घाटिय...

श्री देव सुमन जी की पुण्यतिथि पर:

Image
84 दिन लंबी भूख हड़ताल के शहीद श्री देव सुमन का जन्म उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के बमुंड पट्टी के ग्राम जौल में 25 मई 1915 को हुआ था। इनके पिता का नाम हरिराम बडोनी और माता का नाम श्रीमती तारा देवी था मात्र तीन वर्ष की छोटी सी उम्र में उनके सर से पिता का साया उठ गया। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय से की और टिहरी से मिडिल पास किया। 1930 में सुमन जी ने मात्र 14 वर्ष की उम्र में "नमक सत्याग्रह" आंदोलन में भाग लेकर साबित कर दिया था कि उनके अंदर देश प्रेम की भावना किस हद तक भरी हुई थी। 1932 में देहरादून में वह अध्यापक बने। "सुमन गौरव" एक राष्ट्रीय कविता संग्रह प्रकाशित किया। साप्ताहिक हिंदू समाचार पत्र का संपादन शुरू किया। 1937 में शिमला हिंदी साहित्य सम्मेलन के कार्यकारी अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 1938 में जवाहर लाल नेहरू पौड़ी आए। उनकी सभा में सुमन जी ने दोनों टिहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल दोनों की अखंडता पर जोर दिया। 1939 में टिहरी रियासत में प्रजामंडल (रियासतों में कांग्रेस, प्रजामंडल के नाम से सक्रिय थी) की स्थापना के बाद सक्रिय सदस्य ब...

नरेंद्र सिंह नेगी जी के कुछ चुने हुए गीत।

Image
बद्री केदारनाथ गीत जो की घर जवें फ़िल्म में से है- जय बद्री केदारनाथ -2 गंगोत्री जय जय, जमुनोत्री जय जय -2 हे बाबा केदार तेरो  जन ऊंचो स्थान, हो... तन ऊंचों राखी, ये देश कू मान,  जुग जुग बटीं य दुनिया रे बाबा  त्यारा  दर्शनू कू आणीं छा दुःख विपदा ते मां छोड़ी की सुख उखड़ी ली जाणीं छा  हे बाबा, सुख उखड़ी ली जाणीं छा  हे शंभू  जो जस दे भगवान  जो जस दे भगवान  अखण्ड त्येरी ज्योत जाणीं बद्री विशाला तने रखी अखंड ये मुलुक ये हिमाला हरिजनू को भेद भाव ना  ठाकुर   Thakur baahman jaat paat Aas aulaad aur des ka khatir Hita bhai behno saath saath Hita bhai behno saath saath Hey Naarain, sabhi teri chaa santaan Sabhi teri chan santaan Jai badri kedarnath Gangotri Jai jai Jamunotri jai jai ————————————————– अपड़ी तों सरम्येली आंख्युं, अपड़ी तों सरम्येली आंख्युं, अपड़ी तों सरम्येली आंख्युं देखण दया जरा इना ता देखा देखण दया जरा इना ता देखा तुमारी समणी सरम च आणि,हम्तै भारी सरम च आणि पैली तुम जरा उना ता देखा, हो पैली तुम जरा उन ता देखा ...